यह ऐतिहासिक तालाब नहीं बल्कि छतरपुर शहर में मध्यप्रदेश शासन की अरबो रूपये की सम्पति पर कब्जा है
- शहर के सुंदर बनाने सड़को पर कब्जे मुक्त करा रही विधायक क्या तालाबों को अतिक्रमण मुक्त करने एक्शन मूढ़ में होंगी।।
(धीरज चतुर्वेदी, छतरपुर बुंदेलखंड)
लग रहा है कि छतरपुर शहर स्वच्छ-सुंदर बनाने के क्षेत्रीय विधायक ललिता यादव बेहद संवेदनशील है, सड़को से कब्जे हटाये जा रहे है,, तो इस कार्यवाही में ऐतिहासिक तालाबों के कब्जेधारियों पर क्यों मेहरबानी। यह केवल तालाबों पर कब्जे नहीं है बल्कि मध्यप्रदेश शासन की अरबो रूपये की सम्पत्ति पर अतिक्रमण है, जिन्हे बेदखल कर छतरपुर शहर के विकास को नई दिशा दी जा सकती है। क्या विधायक जी और प्रशासनिक अमले की इनायत इस तरफ होंगी?
याद करे कि पिछले दिनों किशोर सागर तालाब पर पुराई कि खबरें प्रकाशित होने के बाद विधायक जी मौके पर पहुंची थी तब शहनाई गार्डन के संचालक ने उन्हें गुमराह करते हुए झूठ परोस दिया था. जबकि इस मैरिज हॉउस के संचालक के पास डायवर्सन तक नहीं है। महत्वपूर्ण तथ्य कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने डायवर्सन के आवेदन पर अपना अभिमत स्पष्ट कर खसरा नंबरो को तालाब की भूमि माना था। किशोर सागर तालाब के मामले में एनजीटी का साफ आदेश है कि तालाब के मूल रकवे, फुल टेंक लेबल भराव क्षेत्र सहित 9 मीटर के ग्रीन जोन से सभी कब्जे हटाये जाये. लेकिन अधिकारी भी गोलमाल है जो मूल रकवे और ग्रीन जोन कि बात करते है पर भराव क्षेत्र (फुल टेंक लेबल) के आदेश को हजम कर रहे है। ज़ब तालाब में पुराई की जा रही थी और विधायक मौके पर पहुंची तब ठेकेदार रामनरेश शुक्ला ने सीधे तौर पर शहनाई गार्डन के संचालक पर पुराई करने के आरोप लगाये थे। विधायक ने ठेकेदार को पुराई नष्ट कर यथावत करने के निर्देश भी दिये थे लेकिन सब हवा हवाई साबित हुआ। अब ज़ब पूरे शहर से अतिक्रमण हटाने की मुहीम चल रही है तो आमजन के मन में प्रश्न कोंध रहा है कि क्या अदालत के आदेश बाद किशोर सागर तालाब कब्जा मुक्त होगा? अन्य तालाबों के कब्जे भी हटाये जायेंगे?
तालाबों की सम्पत्ति मध्यप्रदेश शासन की है. जिसकी क़ीमत अरबो रूपये में है. तालाबों से अतिक्रमण हटाकर छतरपुर का प्रशासन शहर के विकास को नई पहचान दे सकता है तो शासन की अमूल्य कीमती जमीन क्यों कब्जा मुक्त नहीं कराई जा रही। क्या बिकाऊ तंत्र है जो सिस्टम का रोग पालकर कैंसर रूपी कब्जो को नहीं हटा पा रहा है।
