मरम्मत का 'खेल': जनता का पैसा, भ्रष्टाचारियों का ऐश।।
छतरपुर / बिजावर ।। विजावर विकासखंड में शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी बानगी सामने आई है। मरम्मत के नाम पर आए लाखों रुपये स्कूलों तक पहुंचने से पहले ही हजम कर लिए गए। आरोप है कि पनागर, कन्या विजावर, मॉडल विजावर, किशनगढ़, सटई, गुलगंज, गुलाट और कुपी के प्राचार्यों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी से सेटिंग कर एक ईंट तक नहीं लगवाई और पूरी राशि डकार गए।
सूत्रों का दावा है कि जिस पैसे से स्कूलों की टपकती छतें सुधरनी थीं, दीवारों पर पुताई होनी थी, उसी पैसे से पहले पनागर स्कूल के प्राचार्य श्री पब्या की शाही विदाई पार्टी हुई। इसके कुछ दिन बाद ही बीईओ श्री हिंगवासिया की विदाई में भी जमकर पैसा बहाया गया। चर्चा है कि दोनों पार्टियों में 5-5 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हुए। टेंट, कैटरिंग, गिफ्ट और मंच सज्जा पर लाखों की फिजूलखर्ची हुई, जबकि कई स्कूलों में आज भी बच्चे टूटी बेंच और सीलन भरी दीवारों के बीच पढ़ने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग ने कागजों में सभी स्कूलों की मरम्मत पूर्ण दिखाकर राशि आहरित कर ली। मौके पर न रंग-रोगन हुआ, न फर्श सुधरा, न शौचालय ठीक हुए। किशनगढ़ और सटई के अभिभावकों ने बताया कि बारिश में बच्चों को क्लास से बाहर निकालना पड़ता है। वहीं गुलाट स्कूल में खिड़की-दरवाजे तक टूटे पड़े हैं।
इस पूरे खेल के बाद अब सवाल उठ रहा है कि आखिर विदाई पार्टियों के लिए 10 लाख रुपये से ज्यादा की रकम कहां से आई? क्या मरम्मत मद को ही पार्टी फंड बना दिया गया? स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कलेक्टर से मामले की विजिलेंस जांच और स्पेशल ऑडिट की मांग की है। उनका कहना है कि बीईओ ऑफिस से लेकर सभी 8 स्कूलों के पिछले 2 साल के मरम्मत बिल, वाउचर और जियो-टैग फोटो की जांच हो तो करोड़ों का घोटाला सामने आ सकता है।
फिलहाल जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय इस मामले पर कुछ भी बोलने से बच रहा है। यदि उच्च स्तरीय जांच हुई तो कई सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।
