लवकुशनगर में मवेशियों की अवैध तस्करी का बड़ा खेल: पुलिस की नाक के नीचे चल रहा भैंस-पड़वा बेचने का काला कारोबार, आखिर कौन है इनका आका?
छतरपुर।। लवकुशनगर। थाना अंतर्गत इन दिनों मवेशियों की अवैध खरीद-फरोख्त और तस्करी का धंधा चरम पर है। दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक, खुलेआम भैंस और पड़वा (भैंस के बच्चे) को गाड़ियों में भरकर कहीं भेजा जा रहा है। सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह उठता है कि आखिर इन बेजुबान जानवरों को इतनी बड़ी तादाद में खरीदने वाले ये लोग कौन हैं?
थाने के रिकॉर्ड से गायब हैं तस्करों के नाम।।
सूत्रों के मुताबिक, इस अवैध कारोबार में लिप्त बाहरी और स्थानीय खरीदारों की पुलिस के पास कोई पुख्ता जानकारी या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। बिना किसी वैध दस्तावेज, डाक्टरी परीक्षण या रसीद के, मवेशियों को गाड़ियों में ठूस-ठूस कर भरा जाता है। नियम-कानूनों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे इस रैकेट ने क्षेत्र की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इलाके में यह चर्चा जोरों पर है कि बिना किसी ऊंचे रसूख या रक्षक की शह के इतना बड़ा अवैध नेटवर्क चलना नामुमकिन है। आखिर वह कौन सी 'सफेदपोश' ताकत है, जिसके दम पर ये तस्कर बेखौफ होकर घूम रहे हैं? जनता के बीच अब यह सुगबुगाहट तेज हो गई है कि इस खेल में कहीं न कहीं खाकी और खादी की सांठगांठ तो नहीं है?
पुलिस को गुमराह कर निकाली जा रही हैं गाड़िया।।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि लवकुशनगर पुलिस को लगातार गुमराह किया जा रहा है। तस्करों के मुखबिर और एजेंट इतने सक्रिय हैं कि वे पुलिस की लोकेशन ट्रैक कर चकमा देते हुए मवेशियों से लदे वाहनों को सुरक्षित सीमा पार करवा देते हैं। आखिर वह कौन सा 'मास्टरमाइंड' है, जो पुलिस की आंखों में धूल झोंककर इन गाड़ियों को बेधड़क पास करवा रहा है?
बड़ा सवाल, क्या लवकुशनगर थाना पुलिस इस रैकेट का पर्दाफाश कर मुख्य सरगना को सलाखों के पीछे भेजेगी, या फिर चंद रुपयों की खनक के आगे बेजुबान जानवरों की चीखें इसी तरह दबा दी जाएंगी? स्थानीय जनता अब इस मामले में उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप और सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।
