**डाक्टर की लापरवाही से बढ़ रहा जनाक्रोश**
छतरपुर:-बकस्वाहा बकस्वाहा मुख्यालय पर स्थित सरकारी पशु चिकित्सालय में हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। मवेशियों के इलाज के लिए पशुपालकों को दर-दर भटकना पड़ रहा है। शनिवार को सामने आए एक मामले में गौ पालक राकेश लोधी और विशाल ने बताया कि वे लगातार चार दिनों से पशु चिकित्सालय के चक्कर काट रहे हैं लेकिन वहां डॉक्टर और स्टाफ की अनुपस्थिति के कारण उन्हें अपने गौवंश का इलाज घर पर ही करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
विकासखंड बकस्वाहा में एक मुख्य पशु चिकित्सालय और चार उप स्वास्थ्य केंद्र हैं लेकिन डॉक्टरों और अन्य स्टाफ की गैरहाजिरी के कारण मूक पशुओं को गंभीर संकट का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय पशुपालकों का कहना है कि जब भी वे अपने मवेशियों को इलाज के लिए लाते हैं तो चिकित्सालय में डॉक्टर मौजूद नहीं होते। ऐसे में केवल कंपाउंडर के माध्यम से ही इलाज किया जाता है, जिसमें उपयोग की जाने वाली दवाइयाँ और अन्य सामग्री उन्हें बाजार से खरीदनी पड़ती हैं। सोमवार को नगर परिषद के कर्मियों द्वारा गाय को ले गये जहां पशु चिकित्सालय में उचित देखरेख नहीं होने पर मरणासन्न की स्थिति बन गई है बकस्वाहा में कई मवेशी गंभीर बीमारियों का सामना करते दम तोड़ने के कगार पर हैं।
स्थानीय लोगो का कहना है कि कुछ गैर जिम्मेदार लोग सरकारी दवाओं का दुरुपयोग कर मोटी रकम कमा रहे हैं, जिससे अस्पताल की स्थिति और बिगड़ गई है। प्रशासन की सक्रियता की उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही उचित चिकित्सा उपलब्ध हो सकेगी और पशुपालकों की समस्याओं का समाधान किया जा सकेगा। अगर स्थिति में सुधार नहीं होता है, तो मूक पशुओं के लिए यह चिंता का विषय बना रहेगा।
इस गंभीर मुद्दे पर तहसीलदार भरत पांडे ने कहा, "मुझे मामले की जानकारी मिली है। सामुदायिक पशु चिकित्सालय में पदस्थ डॉक्टरों और स्टाफ को नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे जवाब मांगा जाएगा। हम इस मामले को गंभीरता से लेंगे।" उन्होंने कहा कि जल्द ही इस मामले की जांच की जाएगी और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी/
**नरेंद्र सर्राफ अधिमान्य पत्रकार**