**आदिवासी बाहुल्य हिरदेपूर गांव मे सड़क की समस्या से ग्रामीणों परेशान**
*बदकिस्मती ने नही छोड़ा साथ अस्पताल से जिला अस्पताल होने के लिए भी नही मिली एंबुलेंस*
छतरपुर:-बक्सवाहा/कहने को हम विकासशील देश में रहते है जहां एक्प्रेस वे की बाते करते है वही गांव गांव तक सड़क पहुंचाने का दावा करते पर आज भी यैसे कई गांव है जहां एंबुलेंस तक नहीं पहुंच पाती और पूरा सिस्टम चारपाई पर दिखाई देता है फिर चाहे कोई बीमार हो जाए या प्रसव के लिए महिलाओं को अस्पताल जाना है सबको चारपाई पर ले जाना होता है जब जाकर कही इलाज मिल पाता है हम बात कर रहे है छतरपुर जिले के जनपद पंचायत वकस्वाहा की ग्राम पंचायत वीरमपुरा के गांव हिरदेपूर की जो आदिवासी बाहुल्य ग्राम है और सबसे बड़ी बात यह वो गांव है जो हीरा भण्डारण क्षेत्र में आता है पर शायद सरकार इस गांव से वादा करके भूल गई है जब देश में सबसे अच्छे हीरा भण्डारण की बात हुई तो इसके आसपास आने वाले 16 गांव चर्चा में आए जिनमें से एक हिरदेपुर भी था पर हीरा भण्डारण वाले ग्राम से सरकार ने वादा किया कि यहां सड़क समेत सभी मूलभूत सुविधाएं बेहतर मिलेगी पर हीरा निकालने पर जैसे ही रोक लगी सरकार अपना वादा भी भूल गई अब इस दयनीय स्थिति को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में चिंता है। ग्रामीण कहते है कि उनकी समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा और आदिवासी समुदाय की कठिनाइयों को नजरअंदाज किया जा रहा है।
*ताजा मामला*
शुक्रवार को गांव की जंगी बारेला उम्र 40 साल को अचानक सीने में दर्द होने लगा पहुंच मार्ग न होने के कारण ग्रामीणों चारपाई पर लिटाया और 1 किलोमीटर तक का सफर तय किया जिसके बाद फिर वाहन से बकस्वाहा लेकर पहुंचे और प्राथमिक उपचार किया गया जिसके बाद डॉक्टर शिवांश असाटी ने जिला अस्पताल रैफर करने को कहां पर बदकिस्मती ने अभी भी साथ न छोड़ा और सिस्टम की मार झेल रही आदिवासी महिला को यहां भी एंबुलेस न मिली उनके पुत्र प्रताप बारेला बृजेश बारेला बताते है की हमारे द्वारा कई बार एंबुलेस को कॉल किया गया पर हर बार जवाब मिला की एंबुलेस को आने में दो घण्टे लग जाएंगे
जिसके बाद आदिवासी परिवार ने गाड़ी की ओर जिला अस्पताल ले गए वही परिजनों ने कहा की उनको आक्सीजन की जररूत थी पर वो एंबुलेस से ही संभव था।।
ग्राम पंचायत वीरमपुरा में कुल सात गांव – वीरमपुरा, तिलई, कसेरा, जगारा, हिरदेपूर, हरदुआ, और डुगासरा + पठा – शामिल हैं, जिनकी कुल आबादी 3107 है। इनमें से हिरदेपूर, हरदुआ, और डुगासरा + पठा पूरी तरह से आदिवासी गांव हैं। हिरदेपूर की आबादी 213 है, जिसमें 102 महिलाएं और 111 पुरुष शामिल हैं।
हिरदेपूर गांव की सड़क की स्थिति बेहद खराब है। तिलई गांव से हिरदेपूर तक की लगभग तीन किलोमीटर लंबी सड़क में से डेढ़ किलोमीटर हिस्सा पूरी तरह से खस्ताहाल हो चुका है। बरसात के दौरान यह सड़क दलदल में बदल जाती है, जिससे ग्रामीणों को अत्यधिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
जर्जर सड़क परेशान आदिवासी
आदिवासी बाहुल्य गांव के सुविधाओं से वंचित ये आदिवासी बाहुल्य गांव है पर सुविधाओं की बात करे तो न सड़क है और न स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध है और न शिक्षा के लिए बेहतर व्यवस्था आलम ये है की बीमारी में भी ईलाज नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि चुनाव के समय नेताओं द्वारा सड़क मरम्मत के आश्वासन दिए जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद ये आश्वासन कभी पूरे नहीं होते। राम सिंह बारेला और रंगलाल बारेला का कहना है कि उन्होंने कई बार सड़क मरम्मत के लिए आवेदन दिए हैं, लेकिन उनकी शिकायतें हमेशा अनसुनी कर दी जाती हैं।
*अस्पताल में क्यों नहीं मिल पाती एंबुलेंस की सुविधा*
बकस्वाहा में ज्यादातर मामलों में देखा गया है की एंबुलेंस समय से नही मिल पाती कारण ये है की बकस्वाहा के लिए सिर्फ एक एंबुलेस लगी हुई है जबकि क्षेत्र बहुत बड़ा है साथ ही एंबुलेस का नियंत्रण अस्पताल के पास नहीं रहता जिस कारण अस्पताल प्रवंधन हस्ताछेप नही कर पता और एंबुलेस व्यबस्था पटरी से उतरती जा रही है।।
डॉक्टर सत्यम असाटी बीएमओ
कहते है मामला बहुत गंभीर है मरीज को एंबुलेस नही मिली जबकि ड्यूटी डॉक्टर के द्वारा और परिजनों के द्वारा एंबुलेस को काल किया गया था फिर भी उपलब्ध नहीं हो सकी में इनके खिलाफ नोटिस भेजूगा!
**नरेंद्र सर्राफ अधिमान्य पत्रकार छत्तरपुर**