जिले की व्यवस्था जिनके जिम्मे सब हो चले लापरवाह।।
आसामाजिक तत्वों को नहीं रहा किसी का खौफ।।
छतरपुर। जिले में मुख्यालय से लेकर सभी तहसील और ग्रामीण क्षेत्रों में शासन द्वारा आम जनता के हित में बनाई गई व्यवस्थाओं की लगातार अंदेखी और तमाम व्यवस्थाओं के जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही ने पूरे छतरपुर जिले में अजीव सी स्थिति बना ली है। चुनाव बाद बनी नई सरकार में मुख्यमंत्री को छोड़कर जिले से बनाए गए एक मंत्री और पांच विधायकों का रवैया भी जनहित से जुड़ी तमाम समस्याओं पर महज व्यानबाजी तक ही समिट कर रह गया है। जबकि प्रशासनिक अधिकारी भी केवल औपचारिक्ता निभाते अधिक देखे जा रहे है। जिले में बने इन हालातों में आम जनता की दिक्कतें कम होने की वजह लगातार बढ़ रही है। जिससे जनाक्रोश बढ़ता जा रहा है।
काफी लम्बे समय से जिला अस्पताल में मरीजों की सुविधा उपचार और प्रबंधन को लेकर प्रयोग हो रहे हैं। अभी तक न तो जिला अस्पताल के लिए एक अदद ऐसा सिविल सर्जन भी नहीं मिल पाया है जो अस्पताल का उचित प्रबंध कर सके। यहां करोड़ों की लागत से बनाए गए बहु मंजिला भवन की अंतिम मंजिल तक मरीजों और आम लोगों के लिए सीढिय़ों के अलावा लिफ्ट भी लगाई गई है। लेकिन आए दिन यह सुविधा और सेवा बंद हो जाती है। प्राय: गंभीर और बृद्ध रोगियों के अलावा महिलाओं को बेहद परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के आधे से अधिक सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े है यह बात स्वयं सिविल सर्जन स्वीकार कर जल्द सुधार कराने की सिर्फ बात ही कहते रहते है। मरीजों को वार्ड तक स्टेचर की सुविधा तो है लेकिन प्राय: इस सेवा में लगाए गए कर्मचारी और स्टेचर भी नदारत रहते है। विशेष रूप से नाईट ड्यूटी करने वाले कई चिकित्सकों और कर्मचारियों के रवैए को लेकर आए दिन विवाद होना अब जिला अस्पताल में आम बात हो गई है। अनेक मरीजों को अभी भी वाहर से दबाई खरीदने के पर्चे थमाए जा रहे है। जबकि अस्पताल के स्टोर में शासन ने जरूरत और मांग के अनुसार पर्याप्त नि:शुल्क दवाएं उपलब्ध करा रखीं हैं। स्थिति केवल यहीं तक थमी नहीं है बल्कि ड्यूटी टाईम में ही तमाम चिकित्सकों और कर्मचारियों को यहां आए दिन खोजते मरीजों के परिजन देखे जा सकते है। वरिष्ठ अधिकारियों की स्थिति यह हो गई है कि उन्हें बार बार अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद भी नकारा हो चुका प्रबंधन मनमानी करने में कोई संकोच नहीं कर रहा है।
मंगलवार 15 जनवरी की रात जिला अस्पताल में देखने वाले लोग हैरान रह गए जब सटई से दुष्कर्म की शिकार एक मासूम बच्ची के परिजन उपचार के लिए जब जिला अस्पताल लाए तो मौके पर पहुंचे शहर कोतवाली टीआई अरविन्द्र कुजूर के प्रयासों के बाद भी अस्पताल की एक भी लिफ्ट शुरू नहीं हुई और न तीसरे मंजिल तक स्टेचर की व्यवस्था हुई। ऐसे में टीआई कुजूर ने पीडि़त बच्ची को अपने कंधे पर लादकर सीढिय़ों से तीसरी मंजिल के वार्ड तक स्वयं पहुंचाया। सूत्रों के अनुसार यह पहला मौका नहीं है बल्कि जिला अस्पताल में आए दिन यह स्थिति बनी रहती है। ऐसे में स्वभाबिक रूप से मरीजों के परिजनों का अस्पताल के स्टॉफ से विवाद होता रहता है और अस्पताल प्रबंधन मौन साध लेता है।
जिला मुख्यालय से लेकर तहसील कस्बे, जंगलों और कई सुरक्षित ठिकानों पर लम्बे अर्से से जुआ और सट्टा खिलाने वाले सक्रिय है। पुलिस छुटपुट कार्रवाई कर बड़े जुआ फड़ों पर लगाए जाने वाले लाखों के दांव से जुड़े जुआरियों और इनका संचालन करने वालों से मिली भगत के चलते आज तक हाथ नहीं डाल पाई है। इन आसामाजिक गतिविधियों ने कई घरों को तबाह कर डाला है। सूत्रों की माने तो पुलिस को अच्छी तरह इन गत विधियों की जानकारी है लेकिन आए दिन पुलिस तक नीयमित रूप से अच्छी खासी रकम पहुंचाए जाने के आरोप भी लगातार लग रहे है। फिर भी सुधार नहीं हो पा रहा है। पुलिस ऐसे लोगों की तहकीकात ही नहीं करती जो इन गत विधियों से लाखों कमा कर मंहगी गाडिय़ों में घूमते है। इतना ही नहीं चर्चा यह भी है कि बड़े जुआ फड़ों पर दांव लगाने वालों को इन्हीं गाडिय़ों से आस पास के इलाकों से लाने ले जाने का काम किया जा रहा है। जो मौके पर सूत्रों के अनुसार रकम हार जाते है उन्हें मनमाने ब्याज पर तुरंत पैसों का इंतजाम कर दिया जाता है। जिले में यह खेल लम्बे अर्से से बेखौफ चल रहा है।
कुछ दिन पूर्व ही महोबा रोड़, फॉर लाईन ब्रिज के पास एक पूर्व सरपंच और प्रापट्री डीलर की गोली मार कर हत्या के मामले में भी यही हुआ है। हत्या के इस चर्चित मामले में मुख्य आरोपी रिषी मिश्रा घटना के बाद कई दिनों तक आजाद घूमता देखा गया जब मीडिय़ा में लगातार खबरें सुर्खियां बनी तो पुलिस ने बताया कि मुख्य आरोपी फरार हो गया है। उसकी गिरफ्तारी के लिए पहले 5 हजार का इनाम घोषित किया जब यह चर्चा नहीं थमी और पुलिस को कोई कामयाबी नहीं मिली तो इनाम राशि बढ़ाकर 10 हजार कर दी गई। सीधा मतलब यही हुआ कि पुलिस चाहती तो घटना का यह मुख्य और रसूखदार इस जघन्य अपराध का आरोपी पुलिस की समय पर कार्रवाई न होने से ही पुलिस की नाक के नीचे से लापता हो गया।
जिला मुख्यालय सहित जिले का कोई इलाका ऐसा नहीं है जहां नियम विरूद्ध बिना रजिस्ट्रेशन के ट्रेक्टर दौड़ते न देखे जा रहे हों। इतना ही नहीं इन्हीं ट्रेक्टरों से आए दिन सड़क हादसों में मरने वालों और गंभीर रूप से घायलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बीच-बीच में कुछ कारोबारियों में औपचारिक्ता निभाने से अधिक कुछ नहीं हो रहा है। नियम है कि कृषि कार्य के अलावा ट्रेक्टर ट्रालियों का अन्य व्यवसाए में यदि परिवहन हो रहा है तो केवल चालान काटना औरी जुर्माना बसूलना ही पर्याप्त नहीं है ऐसे में तत्काल ऐसे ट्रेक्टर ट्रॉलियों को जप्त किया जाना जरूरी है। जो नहीं किया जा रहा है। पुलिस के साथ सड़क परिवहन विभाग भी नियमित रूप से यह कार्रवाई करें। लेकिन कथित दलालों के जरिए यह महत्वपूर्ण विभाग और उनका महकमा आंख मूंदे हुए है। इस तरह के वाहन जिले भर में व्यवसायिक कारोबार में इनका खुलेआम उपयोग कर लाखों के टेक्स की चोरी कर शासन के राजस्व को चूना लगा रहे हैं। इस स्थिति पर जिले में लगाम कब कसी जायेगी कोई नहीं जानता।
