बिजावर में पत्रकार राकेश राय पर खूनी हमला; पुलिस और शराब माफिया के गठजोड़ ने लोकतंत्र को लहूलुहान किया!"
मारपीट, लूट और जातिसूचक गालियों का आरोप, उल्टा पत्रकार पर ही मामला दर्ज।।
पत्रकार संगठनों का ऐलान—सोमवार को एसपी कार्यालय के सामने होगा बड़ा धरना।।
छतरपुर। जिले के बिजावर क्षेत्र में पत्रकार राकेश राय के साथ हुई मारपीट की घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली और शराब ठेकेदारों के साथ कथित सांठगांठ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकार पर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय पुलिस ने उल्टा पीड़ित के खिलाफ ही प्रकरण दर्ज कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्रकारों में सोमवार को धरना प्रदर्शन करने का फैसला किया है। पत्रकारों के इस धरना प्रदर्शन में सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर का साथ मिला है। वह भी धरना प्रदर्शन में शामिल होंगे।
प्राप्त जानकारी के अनुसार 23 अप्रैल 2026 की रात लगभग 10:30 बजे पत्रकार राकेश राय एक धार्मिक कार्यक्रम से लौट रहे थे। इसी दौरान पिपट स्थित शासकीय शराब दुकान पर हो रहे विवाद और अधिक दाम पर शराब बिक्री की शिकायत पर उन्होंने सवाल उठाया। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर शराब ठेकेदार के लोगों ने अपने साथियों को बुलाया और कुछ ही देर में बोलेरो वाहन से पहुंचे 5-6 लोगों ने मिलकर पत्रकार पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। हमलावरों ने पत्रकार को जातिसूचक गालियां देते हुए बेरहमी से मारपीट की, जिससे उनके शरीर पर गंभीर चोटें आईं।
पीड़ित पत्रकार का आरोप है कि हमलावरों ने उनके दो मोबाइल फोन भी छीन लिए, जिनमें महत्वपूर्ण डाटा मौजूद था। घटना की सूचना थाना बिजावर में देने के बावजूद पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की। आरोप है कि राजनीतिक दबाव में पुलिस ने नामजद आरोपियों को बचाते हुए मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार की और उल्टा पत्रकार पर ही मामला दर्ज करने का प्रयास किया।
इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की भूमिका को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहा है कि आखिर किस दबाव में पुलिस ने पीड़ित की शिकायत को नजरअंदाज कर आरोपियों को संरक्षण देने का काम किया। यदि सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल और लोकेशन की जांच हो जाए, तो सच्चाई सामने आ सकती है।
पत्रकारों ने दी धरना प्रदर्शन की चेतावनी।।
घटना से आक्रोशित पत्रकार संगठनों ने सोमवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि बिना निष्पक्ष जांच के पत्रकारों पर आपराधिक मामले दर्ज करना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला है। साथ ही हमलावरों पर हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज करने की मांग की जाएगी।
पत्रकारों को इस मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता और बुंदेलखंड के गांधी कहे जाने वाले अमित भटनागर का भी समर्थन मिला है। उन्होंने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि पत्रकारों को न्याय नहीं मिला तो वे भी पत्रकारों के साथ धरने पर बैठेंगे।
