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छतरपुर में पुलिस का खौफ खत्म, अपराधियों का हौसला बुलंद।।

छतरपुर में पुलिस का खौफ खत्म, अपराधियों का हौसला बुलंद।।

राजनीतिक दबाव में जकड़ा महकमा, एसपी में निर्णय लेने की क्षमता लापता।।

इवेंटबाजी में व्यस्त पुलिस अधीक्षक, सड़कों पर असुरक्षित आम जनता।।

छतरपुर। जिले में कानून व्यवस्था अब सवाल नहीं, मजाक बनती जा रही है। पुलिस कप्तान अगम जैन के नेतृत्व में जिले की स्थिति ऐसी हो गई है, जहां अपराधियों के लिए खुला मैदान है और आम आदमी के हिस्से में केवल डर और असुरक्षा।
पुलिस कप्तान की  ढीली कमान, कानून का सिस्टम हुआ बेलगाम।।
जिले की पुलिस व्यवस्था इस वक्त बिना दिशा की नाव बन चुकी है। पुलिस अधीक्षक अगम जैन की अपने ही विभाग पर पकड़ कमजोर नजर आ रही है, जिसका सीधा असर यह है कि पुलिसकर्मी भी अब जवाबदेही से मुक्त होकर मनमर्जी पर उतर आए हैं। हालात ऐसे हैं कि अपराधी खुलेआम घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं और पुलिस मूकदर्शक बनी हुई है। सवाल सीधा है जब कप्तान ही नियंत्रण में नहीं, तो व्यवस्था किस भरोसे चले?
राजनीति का रिमोट, पुलिस का कंट्रोल।।
छतरपुर की पुलिस अब कानून से नहीं, बल्कि राजनीतिक इशारों से संचालित होती दिख रही है। राजनेताओं के इशारों पर थानों में टीआई से लेकर सिपाही पोस्टिंग नेताओं के इशारों पर होती है जिस वजह से वो भी अपने राजनैतिन आकाओं के इशारों पर काम करते है। इस तरह  हर छोटे-बड़े फैसले पर कप्तान पर इतना  दबाव इतना हावी है कि  कप्तान की स्वतंत्र निर्णय लेने की हिम्मत ही खत्म हो चुकी है। 
नतीजा यह है कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई फाइलों में दम तोड़ देती है, जबकि रसूखदार तत्व बेखौफ होकर कानून को ठेंगा दिखा रहे हैं।
इवेंट मैनेजमेंट में व्यस्त एसपी,जनता असुरक्षित।।
‘ऑपरेशन विश्वास’ के नाम पर मोबाइल लौटाने, जन्मदिन की बधाई देने और सम्मान समारोहों की चमक-दमक में पुलिस इतनी डूबी है कि जमीनी हकीकत पूरी तरह नजरअंदाज हो चुकी है। सड़कों पर लूट, मारपीट और भय का माहौल है, लेकिन प्राथमिकता फोटो और प्रचार बन गया है। सवाल यही है—क्या अब छतरपुर में सुरक्षा भी सिर्फ एक इवेंट बनकर रह गई है?

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