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नौगांव टीबी अस्पताल को लगा भ्रष्टाचार का क्षय।

नौगांव टीबी अस्पताल को लगा भ्रष्टाचार का क्षय।
CMHO ने शासन के आदेशों को रद्दी में फेंका, 10 नर्सिंग ऑफिसरों का अवैध संलग्नीकरण।।
छतरपुर। जिला चिकित्सालय और स्वास्थ्य महकमे में इन दिनों नियमों की नहीं, बल्कि अटैचमेंट के खेल की तूती बोल रही है। ताज़ा मामला CMHO डॉ. आर.पी. गुप्ता की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, जिन्होंने शासन के स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद नियम विरुद्ध तरीके से 10 नर्सिंग ऑफिसरों को हटाकर दूसरी जगह 'फिक्स' कर दिया है।
​।। अधीक्षक ने खोला मोर्चा।।
​नौगांव क्षय (टीबी) चिकित्सालय के अधीक्षक ने इस मनमानी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सीधे CMHO को पत्र लिख मारा है। पत्र में साफ कहा गया है कि उनके अस्पताल से 10 नर्सिंग स्टाफ को हटाकर गौरिहार विकासखंड के सिविल अस्पताल में अटैच कर दिया गया है। ​नतीजा? टीबी अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह धराशायी हो गई हैं। गंभीर मरीजों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है, जबकि नियम कहते हैं कि संलग्नीकरण पर पूर्णतः रोक है।
।। इनकी हुई शिफ्टिंग, अटैचमेंट सूची।।
​नियमों को ठेंगा दिखाकर जिन नर्सिंग ऑफिसरों को गौरिहार/सिविल अस्पताल नौगाँव भेजा गया है, उनमें शामिल हैं- ​जनक लली कुशवाहा, शिवानी सोनी, आंचल बिसेन, भारती चंदौर, रिमझिम धुर्वे, अनुराधा बेगा, ओमती बेगा, प्रियंका गौण, विशाखा पटैरिया और नेहा अहिरवार।
​सबसे बड़ा सवाल हैं क़ि जब शासन के सख्त निर्देश हैं कि संलग्नीकरण नहीं किया जाएगा, तो फिर CMHO साहब को इन 10 नियुक्तियों में ऐसी कौन सी जरूरत दिख गई कि टीबी अस्पताल को खाली कर दिया?
​मजेदार बात तो यह है कि एक तरफ सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर जिम्मेदार अधिकारी ही स्टाफ की कमी पैदा कर रहे हैं। टीबी जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीज अब स्टाफ की कमी के कारण दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
​अब देखना यह है कि छतरपुर कलेक्टर इस अटैचमेंट खेल पर लगाम कसते हैं या फिर स्वास्थ्य विभाग की यह मनमानी यूं ही चलती रहेगी, कलेक्टर महोदय का ध्यान आपेक्षित।

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