अफसरों के संरक्षण में मनुष्य की जिंदगी से हो रहा खिलवाड़, लाखों रूपए की कमाई में लगे ब्यापारी, सैम्पलों तक सीमित है फूड के अफसर।।
छतरपुर। अधिक गर्मी के कारण शहर में आईसक्रीम और पेप्सी की बिक्री अधिक हो रही है। बच्चों से लेकर बड़े बूढ़े भी इसका सुबह, दोपहर और शाम को उपयोग करते है। जबकि इससे फैलने वाली बीमारियों की परवाह भी नहीं कर रहे हैं। मिलावटी आईसक्रीम और पेप्सी को कारोबारियों के द्वारा शहर सहित पूरे जिले में परोसा जा रहा है। संबंधित विभाग के द्वारा इस ओर कोई ध्यान भी नहीं दिया जाता है। अगर फूड विभाग ध्यान देता है तो केवल सैम्पल लेने तक सीमित रहता है। सैम्पल होने के बाद भी कारोबारी यह हिमलावट का कारोबार बंद नहीं करता है। अगर विभाग के द्वारा सैम्पल लेते समय ही फैक्ट्री को सील कर दिया जाये तो मिलावट का खेला कारोबारियों के द्वारा नहीं खेला जा सकता है। लेकिन फूड विभाग के अफसर इन मिलावटखोरों के इशारे पर ही कार्रवाई करते हैं। अगर बात करें जिले की तो लगभग सैकड़ों की संख्या में आईसक्रीम और पेप्सी की फैक्ट्री संचालित हो रही है। इन कारोबारियों के द्वारा लोगों के बीच मीठा जहर परोसा जा रहा है। जानकारी होने के बाद भी फूड विभाग के अफसर अंजान बने हुए है।
मिलावटी से फैलने वाली बीमारी
डॉ. श्वेता गर्ग ने जानकारी देते हुए बताया है कि मिलावटी आईसक्रीम से बच्चों के शरीर में तरह-तरह की बीमारियों का खतरा बना रहता है। जैसे कि बच्चों के गले में खरास आना, सर्दी सुखाम होना, फेफड़ों में अधिक नुकसान करना पेट में दर्द होना जैसी शरीर में अनेक प्रकार की बीमारी उत्पन्न होती है। इसी प्रकार मिलावटी पेप्सी से लीवर में प्रोबलम होना, सिर में दर्द होना और पेट में अन्य कई तरह की बीमारियां फैलने का डऱ बना रहता है। अगर इसका अधिक सेवन किया जाता है तो आदमी गंभीर बीमारी से ग्रसित हो सकता है। इसलिए आईसक्रीम और पेप्सी के सेवन से बच्चों को ज्यादातर दूर रखना चाहिए।
जानकारी के अनुसार शहर के चौक बाजार स्थित भारी बड़ी मात्रा में आईसक्रीम का निर्माण किया जा रहा है। इसी प्रकार सटई रोड़ पर आईसक्रीम बनाने वाली फैक्ट्री का संचालन हो रहा है। जबकि शहर से बीस किलोमीटर की दूरी पर देवपुर गांव के पास दो आईसक्रीम फैक्ट्रियों का संचालन हो रहा है। इन दोनों फैक्ट्रियां वर्तमान में कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में बनी हुई है। यहां पर विगत दिनों पहले फूड विभाग से वेदप्रकाश चौबे कार्रवाई करने के लिए पहुंचे थे। लेकिन उनको मुंह के तले उंगली दबाकर लौटना पड़ा था। क्योंकि साहब का याराना तब से इन फैक्ट्रियों से बना है जब से संचालित हो रही हैं। इसी वजह से फूड विभाग के अफसर मिलावट खोरों पर कार्रवाई करने से कतरा रहे हैं।
एक्सपायरी डेट की परोसी जा रही पेप्सी
जानकारी के अनुसार इन दिनों अधिक गर्मी पड़ रही है। लोग घर से निकलते ही अपना मुंह तर करने और गर्मी से निजात पाने के लिए ठंडी पेप्सी का उपयोग कर रहे है। जबकि शहर में एक्सपायरी डेट की पेप्सी परोसी जा रही है। जिले सहित शहर में जिसके द्वारा भी पेप्सी का कारोबार किया जा रहा है। उसके द्वारा बड़े आराम से पेप्सी की बोतल से डेट में हस्तक्षेप कर दिया जाता है। इसलिए वही पेप्सी लोगों के लिए जहर का काम कर रही है। पेप्सी पीने के पहले बोतल पर अंकित डेट को अवश्य चैक करें और दुकानदार से उसकी पूरी जानकारी लें। क्योंकि पेप्सी में मिलावट का खेल बड़े पैमाने पर चल रहा है। अधिक मुनाफा कमाने के चक्कर में ब्यापारी लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने में लगे हुए है।
इनका कहना है।
मेरे पास जहां की भी शिकायत आती है वहां कार्रवाई की जाती है। हमारे पास केवल सैम्पल लेने के पावर है। हम किसी भी दुकान या फैक्ट्री को सील नहीं कर सकते है। अगर आईसक्रीम और पेप्सी पर भी कार्रवाई की मुहिम चलाई जायेगी।
वेदप्रकाश चौबे, खाद्य सुरिक्षा अधिकारी, छतरपुर।
