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(अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष) श्रमिक भीं सम्मान के हकदार ।

(अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस पर विशेष) 
श्रमिक भीं सम्मान के हकदार ।
छतरपुर।। लेखिका -प्रतिभा चतुर्वेदी
साथी हाथ बढ़ाना एक अकेला थक जाएगा मिलकर बोझ उठाना। नया दौर फिल्म के इस जीत की कल्पना और खूबसूरत सा पिक्चराइजेशन श्रमिकों की स्थिति  को ध्यान में रखकर ही की गई थी। श्रमिकों के बिना किसी भी क्षेत्र में किसी भी कार्य की कल्पना भी नहीं की जा सकती ।आज का यह दिन 1 मई समर्पित है विश्व भर के लाखों करोड़ों मजदूरो को जो अपना खून पसीना बहा कर बड़ी-बड़ी बिल्डिंग कारखाने, औद्योगिक इकाइयों, मशीनरी या यूं कहें सुई से लेकर विमान तक और जमीन से लेकर आसमान तक हर क्षेत्र में अपना अहम योगदान देते हैं। 
किसी भी समाज और देश के निर्माण में उसके विकास में उन्नति में श्रमिकों की अहम भूमिका होती है ,जबकि समाज उन्हें बड़े ही ही दृष्टि से देखता है। पर्दे के पीछे का ये गुमनाम हीरो  वास्तविक जिंदगी के हीरो होते हैं जो दूसरों के लिए बड़े-बड़े भवन इमारत बनाते हैं और खुद पूरा जीवन कच्चे से झोपड़ी में निकाल देते हैं। दूसरों के लिए सुख सुविधाओं को तैयार करने वाले यह श्रमिक स्वयं के लिए इन साधनों से सदैव वंचित रहते हैं। श्रमिकों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने कार्य की समय सीमा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ही अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत हुई।अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस लाखों करोड़ों मजदूरो के परिश्रम दृढ़ निश्चय और निष्ठा का दिवस है। एक श्रमिक भी देश के निर्माण में अहम भूमिका निभाता है। 
मजदूरों के हित में आंदोलन की शुरुआत हुई अमेरिका से। अमेरिका में 1886 में मजदूरों के एक शिफ्ट में काम करने की अधिकतम सीमा 8 घंटे करने के लिए मजदूर संगठनों द्वारा हड़ताल की जा रही थी हड़ताल के दौरान शिकागो में एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा है मार्केट में बम फोड़ दिया गया इससे वहां पुलिस दल ने गोलीबारी की जिसमें सात मजदूरों की मौत हो गई और कई घायल हुए। इस घटना के 3 साल बाद ही अमेरिका ने श्रमिकों के एक शिफ्ट में काम करने की अधिकतम सीमा 8 घंटे सुनिश्चित कर दी तभी से 1 में को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत शिकागो से हुई और इस दिन हर साल मजदूरों को अवकाश देने का फैसला भी लिया गया पहला अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस 1 में 1889 में मनाने का फैसला लिया गया। भारत सहित विश्व के अधिकतम देश में मजदूरों के 8 घंटे काम करने संबंधित कानून बना भारत में थे लेबर किस पार्टी ऑफ हिंदुस्तान द्वारा मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत चेन्नई में 1 में 1923 की गई। भारत देश में बेशक 8 घंटे काम करने का कानून लागू हो लेकिन देश में अधिकतर प्राइवेट कंपनियां या फैक्ट्रियां श्रमिकों से 12 घंटे तक काम करते हैं जो कि श्रमिकों के साथ अन्याय और शोषण है।आज जरूरत है कि इस महंगाई के समय में प्राइवेट कंपनियां कारखानों और अन्य रोजगार देने वाले माध्यमों के लिए कानून होना चाहिए जहां शाम को की मजदूरी इतनी होना चाहिए कि श्रमिक के परिवार का पालन मूलभूत आवश्यकता है भोजन और शिक्षा से वंचित न रहना पड़े इस दिवस को मनाने का उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों सामाजिक न्याय और कामकाजी परिस्थितियों में सुधार लाना व दुनिया के सामने उनकी तकलीफों को उजागर करना है। मजदूर व उनके अधिकारों के प्रति स्वयं मजदूरों में आम लोगों में जागरूकता लाना है। हर साल मजदूर दिवस एक थीम के साथ मनाया जाता है मजदूर दिवस 2024 की थीम है जलवायु परिवर्तन के बीच कार्य स्थल सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित करना। आज के दिन हमारे अपने देश में भी कई राज्यों में मजदूर या श्रमिक दिवस या लेबर डे के उपलक्ष में कई कंपनियों और संस्थानों में अवकाश रहता है 1 में को महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोवा ,बिहार, असम, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना ,मणिपुर, केरल ,तमिलनाडु और बंगाल में अवकाश होता है। शेष राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी श्रमिकों के सम्मान में अवकाश घोषित होना चाहिए। 
आखिर श्रमिक भी सम्मान के हकदार हैं।

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