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नशे और अपराध के दलदल में फस्ते युवा ।।

नशे और अपराध के दलदल में फस्ते युवा ।।
(लेखिका -प्रतिभा चतुर्वेदी)
छतरपुर।। क्रूरता,वहशीपन,अमानवीय कृत्य और रोंगटे खड़े कर समाज को झकझोर देने वाली कई घटनाएं और उन घटनाओं के वीडियो आएदिन सामने आ रहे है। ऐसी घटनाओं को अंजाम देने वाले युवा अपना दबदबा कायम करने और समाज में दहशत फैलाने के उद्देश्य से घटनाओं के वीडियो बनाकर खुद ही वायरल करते है।
आखिर इस सबके पीछे कारण क्या है। प्रमुख कारण गली मुहल्ले की दुकानों पर  बिकने वाले किसी न किसी प्रकार का नशा है।  जो आसानी से उपलब्ध हो जाता है। नशे के चंगुल में बहुतेरे युवा फंसते जा रहे है और नशा ही अपराध की जननी है।
फिल्मों  सीरियल और बेबसीरीज  का समाज पर सीधे तौर पर प्रभाव पड रहा है। फिल्मों की बनावटी व चकाचौंध करने वाली दुनिया से प्रभावित होकर फैशन के रंगढंग बोलचाल हावभाव भाषा शैली क्रियाकलाप तक लोग आत्मसात करते नजर आ रहे है। तीन घंटे की फिल्म या बेवसीरीज में लगभग ढाई घंटे बुराई अच्छाई पर हावी होते दिखाई जाती है। अंत के क्लाईमैक्स के कुछ मिनटों में अच्छाई की विजय होते दिखा देते है । यही वजह है कि आज के युवा को झूठ का साम्राज्य , बनावटी दुनिया.  घर से ज्यादा बाहरवालो को तरजीह देना और सबसे अहम कम समय में बड़ा आदमी बनना शार्टकट के रास्ते धन कमामें की लालसा युवाओं को नशा और अपराध की ओर धकेल रहा है।
नशा नाश की जड़ है नशे की गिरफ्त में फंसती युवा पीढ़ी अपराध की डगर पर बढ़ती जा रही है। नशे का आदि युवा अपना मानसिक संतुलन खोता जा रहा है। नशे के मद में वह ऐसे कृत्य कर बैठता है जिसका खामियाजा स्वयं उसको व उसके परिवार को भुगतना पड़ता है ।
पिछले दिनों छतरपुर और भोपाल में नशेलची युवाओं की क्रूरता के वायरल वीडियो नें सभी को हिला कर रख दिया। जिसमे नशे में लिप्त युवाओ नें अन्य युवक को निर्वस्त्र कर बेरहमी से मारपीट कर मानवता की सारी हदें पार कर दी । अपराधी बेखौफ होकर निडर नजर आए।आखिर क्यों? नशे की मदहोशी मे कोई भी बेखौफ भी हो जाता है और निडर भी हो जाता है। नशा तो बोतल में भी होता था पर जेनरेशन गैप की तरह आज न जाने कितने प्रकार के नशे युवाओं को खोखला कर रहे है। बोतल का नशा तो बहुत मामूली चीज है पर समय के साथ आधुनिकरण तो नशे का भी हुआ है। ड्रग्स, गांजा,अफीम, इंजेक्शन,स्मैक, मेडिकल की दुकान पर मिलने वाली नशे की गोलियां और इंजेक्शन सहित ना जाने कितने प्रकार के नशे उपलब्ध हो रहे है। 
नशा बेचने वाले लोग लालच के चलते न जाने कितनी युवाओं को बर्बाद कर रहे हैं। पहले उनको फ्री में इसका सेवन कराया जाता है और धीरे-धीरे उन्हें उसका आदि बनाकर मानसिक रूप से गुलाम बना लिया जाता है।  नशे का आदि युवा अपनी तलब को मिटाने के लिए यहां -वहां, जहां- तहां जैसे भी हो पैसे का इंतजाम करता है और उस पैसे के इंतजाम के चक्कर में वह चोरी करने लगता है। बाहरी लोगो से, दोस्तो से या कर्ज़ देने वालो से ब्याज पर पैसा ले लेता है और इस पैसे को चुकाने के लिए वह बाहरी दुनिया में अन्य गलत कम करने लग जाता है। इस तरह वह धीरे धीरे नशे और अपराध के दलदल में फसता चला जाता है। नशे और अपराध का चोली दामन का साथ है।नशा बेचने वाले स्कूल कॉलेज परिसर केआसपास, चाय पान की गुमटियों के आसपास,बस स्टैंड,रेलवे स्टेशन के आसपास सक्रिय रहते है। नशे कारोबार के रैकेट में पूरा चेंन सिस्टम काम करता है जिसमे नोटों की गड्डियों में बिकने वाला तंत्र भीं शामिल है। जब कोई बड़ा अपराध होता है तो छोटी मछलियों को धर लिया जाता है और बड़ी मछलियां साफ बच निकलती है।
युवापीढ़ी के भविष्य को बचाने के लिए जरूरी है कि स्कूल ,कॉलेज गली मुहल्ले में नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से नशा निरोधक जागरूकता शिविर लगाए जाएं। नशे से होने वाली हानि और नुकसान से अवगत कराया जाए। नशा करने वाले लोगो को नशामुक्ति केंद्र में रखकर नशे की बुरी आदत से मुक्ति दिलाई जाए। साथ ही समाज को शारीरिक, मानसिक, आर्थिक रूप से पंगु बनाने और चोटिल करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही की जानी चाहिए। नशे रुपी स्लो पाइजन से समाज को खोखला करने वाले ऐसे लोग समाज के सबसे बड़े दुश्मन है। जो मासूम बच्चों को बरगला कर अपना मकसद पूरा करते हैं और नशे के लालच में जघन्य अपराधों को करवाने का कृत्य करते है।

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