Home छतरपुर / खजुराहो **बे – लगाम दौड़ती मौत की ऑटो ।।

**बे – लगाम दौड़ती मौत की ऑटो ।।

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छत्तरपुर से बमीठा के बीच दो दिन में 10 से ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं में मौत।।
छतरपुर // खजुराहो:- कल सुबह 5बजे झांसी खजुराहो हाईवे कदारी गांव के  पास दर्दनाक हादसे झंकझोर कर रख दिया। प्रत्यक्ष दर्शियो एवम प्रशासनिक अधिकारीयो अनुसार लखनऊ का एक छतरपुर रेलवे स्टेशन से बागेश्वर धाम ऑटो जा रहा था तभी हाईवे पर खड़े ट्रक से ऑटो जा टकराई और एक्सीडेंट इतना भीसड़ हुआ कि मौके पर ही परिवार के चार लोगो सहित एक वर्ष के बच्चे की मौत मौके पर ही गई । बाकी दो घायलों ने अस्पताल ले जाते वक्त रास्ते में दम तोड दिया और 7से ज्यादा लोग बुरी तरह से जख्मी हुए हैं जिनका इलाज जिला अस्पताल में जारी है 

हाइवे 39 झांसी खजुराहों पर एक साल का नन्हा बच्चा सहित तीन आंगन की फुलवारी बच्ची  के रूप में डूबकर मरी इंसानियत का आज दूसरा दिन है। गांव से लेकर शहर तक हर घर में मासूमों और बुजुर्गो की मौत का मातम है, आंखें भी नम हैं और इस आघात से लगे ज़ख़्म पर लोग सांत्वना का मरहम भी लगा रहे हैं। जिन आंगन की क्यारियों के महकते फूल बेईमानी, लापरवाही के हाथों से नोचे गए हैं, वे पत्थर दिल मौत के सौदागर ज़िम्मेदार बगैर किसी शिकन अपनी बदनाम करतूतों पर न तो शर्मिंदा नज़र आ रहे हैं और न ही उन्हें, उनके किये जुर्म पर मुजरिम तो क्या मुल्ज़िम भी बनाया जा रहा है|

सरकारी नोकरी में रहकर जन की नही धन की बात मानने वाले अफ़सर और कर्मचारी की तुलना उस वेश्या के दलाल से कम नही की जा सकती जो  बस यही हाल जनता का है। सिस्टम के हाथों लाचार, मजबूर जनता को लूटने के लिए सरकारी चोला ओढ़े दलाल ग़ैर कानूनी तरीक़ों से दौलत-शौहरत बनाने वालों को कोठरी में धकेल रहे हैं और इस करतूत से पीड़ित कराह रहे हैं।लिखने और कहने को बहुत कुछ है, कौन जिम्मेदार है। जनता और ज़िम्मेदार सब जानते हैं, मगर जांच कानूनी प्रक्रिया का एहम हिस्सा है। इसके पूरा होने पर कार्रवाई भी होना चाहिए और इसके पूर्व होते हुए दिखाई भी देना चाहिए।अंत में यही कहना और करना सही होगा कि ऐसे भ्रष्टाचार में लिप्त
शासन-प्रशासन के पूरे नही जितने भी अधिकारी-कर्मचारी हैं, वे इंसानियत को धन के बजाय मानवीयता के पलड़े में रखें और तराज़ू में ज़मीर को कम कर न तोलें। हाइवे एनएच 39की हृदय विदारक घटना के बाद भी ज़िला मुख्यालय के अलावा कस्बों-देहातों में ऑटो और बसों में मुसाफिरों को जानवरों की तरह भरकर ढ़ोया जा रहा है। यात्री बसें नियमों को तक में रखकर दौड़ाई जा रही हैं। शीशों के बजाए पॉलिथीन के पैबंद बस में लगे हैं, नंबर प्लेट पर अधूरे नंबर लिखे हैं, जो आमजनों को तो दिखाई दे रहा है, ज़िम्मेदारों को नही। पैबंद लगी अनफिट बसों, स्कूली वाहनों को फिट क़रार देने का कारनामा भी छतरपुर में सड़क पर देखा जा सकता है।मैने स्वयं कई ओवर लोड ऑटो को लेकर कई वीडियो वायरल किए और अखबारों में खबरों को प्रकाशित किया लेकिन प्रशासन के कानों में जू तक नहीं रेंगा। घटना के बाद एक दो दिन प्रशासन सक्रिय रहेगा इसके बाद पुनः अपनी निष्क्रिय भूमिका आ जायेगा।
**नरेंद्र सर्राफ अधिमान्य पत्रकार**

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